आर्नोल्ड प्रेस: सही तकनीक और सबसे बड़ी गलतियां

आर्नोल्ड प्रेस देखने में साधारण सीटेड डम्बल प्रेस जैसा लगता है, लेकिन इसमें जो रोटेशन होता है वही ज्यादातर लोगों के कंधे बिगाड़ देता है। आइए समझते हैं कि यह एक्सरसाइज क्लासिक मिलिट्री प्रेस से ज्यादा मुश्किल क्यों है और रोटेटर कफ में दर्द के बिना इसे कैसे किया जाए।

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आर्नोल्ड प्रेस क्लासिक डम्बल प्रेस से कैसे अलग है

आर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर ने साधारण प्रेस में एक रोटेशन फेज जोड़ा - डम्बल्स ठोड़ी के लेवल पर हथेलियां अपनी तरफ करके शुरू होते हैं और ऊपर जाकर हथेलियां आगे की ओर घूम जाती हैं। इससे फ्रंट और मिडिल डेल्ट्स का काम बढ़ जाता है और रोटेटर कफ भी एक्टिव होता है। रोटेशन की वजह से यह एक्सरसाइज कोऑर्डिनेशन के हिसाब से मुश्किल होती है, इसलिए वजन साधारण सीटेड डम्बल प्रेस से 15-20% कम रखें। अगर आप डम्बल प्रेस 2×14 किलो से 10 रेप्स करते हैं, तो आर्नोल्ड प्रेस 2×10-12 किलो से शुरू करें।

स्टेप-बाय-स्टेप सही तकनीक

85-90° बैक सपोर्ट वाली बेंच पर बैठें, कमर और कंधे की हड्डियां बैकरेस्ट से सटाएं। डम्बल्स को चेस्ट के सामने कॉलरबोन लेवल पर पकड़ें, कोहनियां नीचे, हथेलियां अपनी तरफ, डम्बल्स लगभग एक-दूसरे को छूते हुए। सांस छोड़ते हुए ऊपर की ओर प्रेस करें और साथ-साथ कलाइयों को घुमाएं ताकि टॉप पोजीशन पर हथेलियां आगे की ओर हों और कोहनियां शरीर की लाइन से थोड़ी आगे रहें (कानों के पीछे न जाएं)। ऊपर डम्बल्स को आपस में न टकराएं और कोहनियां पूरी तरह लॉक न करें - हल्का सा बेंड रखें। सांस लेते हुए डम्बल्स को उसी रास्ते नीचे लाएं, कलाइयां उल्टी दिशा में घुमाते हुए चेस्ट के सामने वापस आएं।

टॉप 5 गलतियां जो कंधे बर्बाद करती हैं

1) सिर्फ कलाई से रोटेशन करना, शोल्डर जॉइंट को शामिल न करना - इससे कलाई पर ज्यादा दबाव पड़ता है और एक्सरसाइज का असली फायदा नहीं मिलता। 2) बहुत ज्यादा वजन लेना, जिससे मूवमेंट पैरों और पीठ के झटके (चीटिंग) में बदल जाता है। 3) टॉप पोजीशन पर कोहनियां सिर के पीछे चली जाना - इससे कंधे के फ्रंट कैप्सूल पर लोड बढ़ता है और इम्पिंजमेंट सिंड्रोम हो सकता है। 4) ऊपर डम्बल्स का आपस में टकराना - इससे मसल्स पर टेंशन खत्म हो जाती है और जॉइंट्स पर चोट लगती है। 5) शोल्डर ब्लेड्स को फिक्स न करना - पीठ गोल हो जाती है और लोड डेल्ट्स की बजाय गर्दन पर जाता है। एक और आम गलती है सांस रोकना - बहुत लोग पूरे मूवमेंट के दौरान सांस रोक लेते हैं, जिससे पेट के अंदर प्रेशर बढ़ता है और बॉडी की स्टेबिलिटी गिरती है। सांस छोड़ना प्रेस और रोटेशन फेज के साथ-साथ होना चाहिए।

किसे यह एक्सरसाइज सावधानी से या बिल्कुल नहीं करनी चाहिए

अगर आपको पहले शोल्डर जॉइंट में चोट लगी है, सुप्रास्पिनेटस टेंडिनाइटिस या शोल्डर इंस्टेबिलिटी की समस्या रही है, तो आर्नोल्ड प्रेस का रोटेशन फेज दर्द बढ़ा सकता है। ऐसे में बिना रोटेशन वाला सीटेड डम्बल प्रेस या लिमिटेड रेंज स्मिथ मशीन प्रेस बेहतर ऑप्शन है। जिन लोगों को प्रेस मूवमेंट्स का ज्यादा अनुभव नहीं है, उन्हें पहले 3-4 हफ्ते क्लासिक डम्बल प्रेस की तकनीक पर काम करना चाहिए, उसके बाद ही रोटेशन जोड़ें। मसल मेमोरी और ट्रैजेक्ट्री कंट्रोल पहले जरूरी है, जल्दबाजी में एक्सरसाइज को मुश्किल बनाना नहीं।

शोल्डर वर्कआउट में आर्नोल्ड प्रेस कैसे शामिल करें

इसे शोल्डर डे में दूसरे या तीसरे नंबर पर रखें, स्टैंडिंग या सीटेड बारबेल प्रेस के बाद, जब डेल्ट्स वॉर्म-अप हो चुके हों लेकिन थके न हों। 3-4 सेट्स, 8-12 रेप्स, 60-90 सेकंड रेस्ट का रेंज सबसे अच्छा रहता है। अगर आपको यकीन नहीं है कि रोटेशन सही तरीके से हो रहा है, तो साइड से वीडियो बनाकर स्टैंडर्ड टेक्निक से कंपेयर करें, या ट्रेनर को दिखाएं। हमारे Telegram बॉट से आप अपने लेवल और पुरानी चोटों के हिसाब से पर्सनल शोल्डर प्रोग्राम ले सकते हैं, साथ ही वीडियो के जरिए तकनीक चेक करवा सकते हैं।

हफ्ते की प्रोग्राम का उदाहरण

आर्नोल्ड प्रेस पर फोकस के साथ शोल्डर वर्कआउट का मिनी प्लान, इंटरमीडिएट लेवल के लिए सही

दिन 1 - कंधे + ट्रैपेज़ियस
  • सीटेड डम्बल प्रेस 4×10
  • आर्नोल्ड प्रेस 3×10-12
  • साइड लेटरल रेज़ 3×12-15
  • बारबेल अपराइट रो 3×12
  • डम्बल श्रग्स 3×15
दिन 2 - कंधे + ट्राइसेप्स
  • स्टैंडिंग मिलिट्री प्रेस 4×8
  • आर्नोल्ड प्रेस 3×10
  • बेंट-ओवर डम्बल रेज़ 3×15
  • लाइंग ट्राइसेप्स एक्सटेंशन 3×10-12
  • केबल ट्राइसेप्स पुशडाउन 3×12
दिन 3 - कंधे + चेस्ट (स्टेबिलिटी पर फोकस)
  • इंक्लाइन डम्बल प्रेस 4×10
  • हल्के वजन से आर्नोल्ड प्रेस टेक्निक 3×12
  • केबल क्रॉसओवर शोल्डर फ्लाई 3×15
  • शोल्डर टैप प्लैंक 3×30-40 सेकंड
  • रेजिस्टेंस बैंड शोल्डर रोटेशन 3×15

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आर्नोल्ड प्रेस में कंधे क्यों दर्द करते हैं, जबकि साधारण डम्बल प्रेस में नहीं?
सबसे आम वजह है टॉप पोजीशन पर कोहनियां सिर के बहुत पीछे चली जाना, जिससे सुप्रास्पिनेटस टेंडन दब जाता है। ध्यान रखें कि कोहनियां शरीर से थोड़ी आगे रहें, कानों की लाइन के पीछे न जाएं।
आर्नोल्ड प्रेस शुरू करने के लिए कितना वजन लें?
जिस वजन से आप कॉन्फिडेंटली सीटेड डम्बल प्रेस करते हैं, उससे 15-20% कम वजन लें। पहले 2-3 हफ्ते मीडियम वेट के साथ तकनीक पर काम करें, रोटेशन पर पूरा कंट्रोल आने के बाद ही वजन बढ़ाएं।
क्या आर्नोल्ड प्रेस खड़े होकर किया जा सकता है?
तकनीकी रूप से हां, लेकिन बैक सपोर्ट वाली सीटेड पोजीशन कमर को फिक्स रखती है और पैरों से चीटिंग रोकती है, इसलिए तकनीक और जॉइंट सेफ्टी के लिए बैठकर करना बेहतर है।
अगर कलाइयों का रोटेशन सिंक नहीं हो पा रहा तो क्या करें?
पहले 1-2 किलो के हल्के डम्बल्स या बिना वजन के सिर्फ रोटेशन की ट्रैजेक्ट्री पर प्रैक्टिस करें। आप हमारे Telegram बॉट से भी टेक्निक चेक करवा सकते हैं - अपना वीडियो भेजकर बताएं कि किस पर फोकस करना है।

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